Isis अमरीकी दोस्ती से दुश्मनी तक
Isis अमरीकी दोस्ती से दुश्मनी तक
इराक़ी राष्ट्रपति फ़ोआद मासूम और अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच उत्तरी इराक़ में आतंकवादी गुट आईएसआईएल के ठिकानों पर अमरीका के सीमित हमलों के बारे में टेलीफ़ोन पर बाचतीत हुयी। जो बाइडेन ने इराक़ी राष्ट्रपति से बातचीत में इराक़ की स्थिति के बारे में बातचीत की और आतंकवादी गुट दाइश से निपटने में बग़दाद-अरबील सहयोग का स्वागत किया।
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार की रात उत्तरी इराक़ में आईएसआईएल या दाइश के ठिकानों पर सीमित स्तर पर हमले करने का आदेश जारी किया और कहा कि अमरीका इराक़ में अपने हितों की रक्षा का इरादा रखता है और इस संदर्भ में हर क़दम उठाएगा।
यद्यपि अमरीका के इस क़दम का कुछ इराक़ी और अमरीकी अधिकारियों ने स्वागत किया है किन्तु उसके इस क़दम पर विश्व जनमत के मन में कुछ सवाल उठ रहे कि जिसके जवाब से पता चलता है कि अमरीका इराक़ से कोई सहानुभूति नहीं रखता।
अमरीकी समाचार पत्र वाशिंग्टन पोस्ट ने वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों के हवाले से लिखा कि तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल या दाइश न केवल इराक़, लेबनान, तुर्की और जार्डन के लिए ख़तरा है बल्कि इस गुट में पश्चिमी देशों से और आतंकवादियों के शामिल होने से योरोप और अमरीका पर भी इस गुट के हमले की संभावना है।
अमरीका ने इराक़ में दाइश के ठिकाने पर देर से हमले का फ़ैसला ऐसी स्थिति में किया है जब पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अपनी जीवनी में इस बात को स्वीकार किया कि अमरीका ने मध्यपूर्व में अपने हित साधने के लिए आईएसआईएल को अस्तित्व दिया है।
ओबामा 2008 में इराक़ युद्ध को ख़त्म करने के प्रचार द्वारा सत्ता में पहुंचे और 31 दिसंबर 2011 को इराक़ से अमरीकी सैनिकों के निकलने के ढाई साल बाद एक बार फिर अमरीका इराक़ में सैन्य रूप से उपस्थित हुआ है। इस बात में शक नहीं है कि आतंकवादी गुट दाइश क्षेत्र सहित विश्व के लिए ख़तरा है किन्तु इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि इस ख़तरे की जड़ कहां है। वास्तव में अमरीका और उसके घटकों ने अपने हित साधने के लिए आतंकवाद को अच्छे और बुरे भाग में विभाजित कर आतंकवादी गुट दाइश के लिए विध्वंसक गतिविधियों का मार्ग समतल किया है। इराक़ में दाइश की ओर से वर्तमान ख़तरा, सीरिया में अमरीका के आतंकवादी गुटों को चरमपंथी और मध्यमार्गी गुट में विभाजित करने के विचार का परिणाम है। अमरीका ने इस वर्गीकरण की आड़ में सीरिया में आतंकवादियों को अपनी ओर से सैन्य व वित्तीय सहायता का विश्व जनमत के सामने औचित्य पेश किया।
आतंकवाद से संघर्ष में अमरीका के दोहरे मापदंड के मद्देनज़र दाइश के साथ लड़ाई में अमरीका का इराक़ के साथ होना भी, इराक़ में ईसाइयों, ईज़दियों सहित दूसरे राजनैतिक व धार्मिक गुटों के प्रति अमरीका की सहानुभूति को नहीं दर्शाता क्योंकि आतंकवादी गुट दाइश ने लगभग दो महीने पहले अमरीका सहित अपने समर्थकों के इशारे पर उत्तरी इराक़ के मूसिल शहर का अतिग्रहण किया। दाइश का लक्ष्य इराक़ में राजनैतिक प्रक्रिया को प्रभावित करना था। यद्यपि यह लक्ष्य दाइश के षड्यंत्र के बावजूद व्यवहारिक नहीं हो सका किन्तु इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अमरीका इराक़ में आईएसआईएल के विरुद्ध लड़ाई की आड़ में इराक़ में प्रधान मंत्री के चयन के लिए इस देश की राजनैतिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का इरादा रखता है और इस प्रकार निर्भर इराक़ की योजना को व्यवहारिक बनाना चाहता है।
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