इराक़ में दाइश की नींद हराम करने वाले स्वंयसेवियों को रोको :अमरीका
अमरीका के रक्षा मंत्री स्टीवन कार्टर की अप्रत्याशित इराक़ यात्रा से ऐसा लगता है कि यह इराक़ में मूसिल की आज़ादी और इराक़ को आतंकवाद के चंगुल से छुड़ाने के लिये अमरीकी प्लान के हो हल्ले के साथ आए हैं, लेकिन इस यात्रा के पीछे का सच क्या है?
कार्टर की इस यात्रा का इराक़ी बलों और राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ हलक़े द्वारा विरोध दिखा रहा है कि इस यात्रा के पीछे कोई बहुत ही बड़ी साज़िश छिपी हुई है और वाशिंग्टन की तरफ़ से बग़दाद के लिये कुछ विशेष माँगों के साथ कार्टर आए हैं जिसका मूसिल की आज़ादी या फिर इराक़ को आतंकवाद के चंगुल से आज़ाद कराने का कोई वास्ता नहीं है।
वह दाइश जिसे स्वंय अमरीका ने बसरा की बूका जेल में पैदा किया और अपने सहयोगियों द्वारा उसको हथियारों, पैसों, फ़त्वों द्वारा बढ़ाया और तेल की तस्करी में उसका साथ दिया, इससे पता चलता है कि कार्टर की इस यात्रा का मक़सद जैसा दिखाया जा रहा है उसके ठीक उलट इस देश में आतंकवादी के पैर जमाना, धार्मिक मतभेद फैलाना और इराक़ को बांटना है जैसे कि स्वंय अमरीकी और इस्राईली अधिकारी कई बार इस बात को कह चुके हैं।
इस यात्रा के ज़रिये अमरीका ने अपने 560 और सैनिक इराक़ियों पर लाद दिये हैं ताकि वह उनका ख़ून चूसे और फ़ल्लूजा, अलक़या और बहुत जल्द अलहुवैजा एवं मूसिल की आज़ादी का क्रेडिट उनसे छीन सके।
इस समय अमरीका में इराक़ के 4647 सैनिक हैं और इन सैनिकों का इराक़ के केन्द्र और उत्तर में बिखरे होने संदेहास्पद है जिसका मक़सद इराक़ को तीन भाग में बांट कर फेडरह बलों और स्वंयसेवी बलों को आगे बढ़ने से रोकना है विशेषकर स्वंयसेवी बलों को रोकना जिन्होंने आंतकवादियों और उनके समर्थकों की नींद हराम कर दी है और जिन्होंने सलाहुद्दीन, अलअंबार, दयाली, दक्षिणी करकोक की आज़ादी में बड़ा अहम रोल अदा किया है और अब मूसिल की आज़ादी में भी उनका बड़ा किरदार होने वाला है।
अमरीका अपने नए सैनिकों को अभी हाल में ही इराक़ बलों द्वारा आज़ाद कराए गए सैन्य अड्डे अलक़यारह में स्थापित करने के लिये भेज रहा है और इसका कारण यह है कि यह सैन्य अड्डा मूसिल से केवल 40 किलोमीटर की दूरी है और यह पश्चिम से मख़मूर को मिलता है जो कि पीशमर्गा बलों के क़ब्ज़े में है, अमरीका द्वारा अलक़यारह का चुनाव इसी लिये किया गया है ताकि मूसिल की आज़ादी में शामिल होने के लिये इराक़ स्वंयसेवी बलों को रोका जा सके और दूसरी तरफ़ कुर्दिस्तान जो कि लगातार अपने क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों को बढ़ाता जा रहा है और उसने इराक़ से अपने अलग होने का एलान भी कर दिया है को सुरक्षित रखा जा सके।
यही कारण है कि स्वंयसेवी बलों के लीडर हादी अलआमेरी ने इस यात्रा पर बहुत ही तीव्र प्रतिक्रिया दी और उन्होंने कहाः मूसिल इराक़ियों के शक्तिशाली हाथों और उनकी क़ुरबानियों से आज़ाद होगा जैसे फ़ल्लूजा और अलक़यारह आज़ाद हुए हैं, इराक़ को अपनी ज़मीन आज़ाद कराने के लिये इन 560 अमरीकी सैनिकों की ज़रूरत नहीं है।
दूसरे लोगों ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इराक़ अब उस दोराहे पर नहीं खड़ा है जहां पर वह या तो दाइश को स्वीकार करे या फिर अमरीका की तोड़ने वाली पालीसी को बल्कि इराक़ अपने लोगों के ख़ून और मेहनत के बल पर सदैव एक रहेगा।
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