इमाम अली अलैहिस्सलाम के स्वर्ण कथन
इमाम अली अलैहिस्सलाम के स्वर्ण कथन
1. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने मित्रों से प्रेम करो क्योंकि अगर तुम उनके साथ प्रेम नही करोगे तो वह एक दिन तुम्हारे शत्रु बन सकते हैं। तथा अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो क्योकि वह इस प्रकार एक दिन आपके मित्र बन सकते है।
2. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने अलैहिस्सलाम ने कहा कि हर व्यक्ति का मूल्य उसके द्वारा किये गये पुण्यों के बराबर है।
3. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि इबादत से कोई लाभ नही है अगर इबादत तफ़क़्क़ो (धर्म निर्देशों को समझने का ज्ञान) के साथ न की जाये। ज्ञान से कोई लाभ नही अगर उसके साथ चिंतन न हो। कुऑन पढ़ने से कोई लाभ नही अगर अल्लाह के आदेशों को समझने का प्रयत्न न किया जाये।
4. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं आप लोगों के विषय मे दो बातों से डरता हूँ
1- इच्छाओं की अधिकता जिसके कारण व्यक्ति परलोक को भूल जाता है।
2- इद्रियों का अनुसरण जो व्यक्ति को वास्तविक्ता से दूर कर देता है।
5. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने मित्र के शत्रु से मित्रता न करो क्योंकि इससे आपका मित्र आपका शत्रु हो जायेगा।
6. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि सब्र तीन प्रकार का है।
1-विपत्ति पर सब्र करना।
2-अज्ञा पालन पर सब्र करना।
3-पाप न करने पर सब्र करना।
7. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि मर जाओ परन्तु अपमानित न हो, डरो नहीं बेझिजक रहो क्योंकि यह जीवन दो दिन का है। एक दिन तेरे लिए लाभ का है तथा एक दिन हानि का लाभ से प्रसन्न व हानि से दुखित न हो क्योकि इन्ही दोनो के द्वारा तुझे परखा जायेगा।
8. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि शहरों की आबादी देश प्रेम पर निर्भर है।
9. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि ज्ञान के तीन क्षेत्र हैं
1- धार्मिक आदेशों का ज्ञान
2- शरीर के लिए चिकित्सा ज्ञान
3- बोलने के लिए व्याकरण का ज्ञान
10. हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि मोमिन (आस्तिक) को अपशब्द कहना इस्लामी आदाशों की अवहेलना है। मोमिन से जंग करना कुफ़्र है। व उसके माल की रक्षा उसके जीवन की रक्षा के समान है।
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