ईश्वर न्याय करने वाला है
ईश्वर न्याय करने वाला है
अद्ल
उसूले दीन में अद्ल को तौहीद के बाद शुमार किया जाता है। अद्ल से मुराद यह है कि अल्लाह आदिल (इंसाफ़ वाला) है और किसी पर ज़ुल्म नही करता। ख़ुदा वंदे आलम अद्ल, नबुव्वत, इमामत, क़यामत, जज़ा (ईनाम) व सज़ा, अहकाम की हिकमतों और तमाम कामों से मुतअल्लिक़ है लिहाज़ा अगर ख़ुदा के अदल को न माना जाये को बहुत से इस्लामी मसायल हल नही हो पायेगें।
ईश्वरीय न्याय का अर्थ
ईश्वरीय न्याय के बहुत से अर्थ बयान हुए हैं जिनमें से कुछ यह है
* ख़ुदा आदिल है यानी वह हर ऐसे काम से पाक है जो मसलहत और हिकमत के विरुद्ध हों।
* ख़ुदा आदिल है यानी उस की बारगाह में तमाम इंसान बराबर हैं और अमीर ग़रीब, गोरे काले, आलिम जाहिल, वग़ैरह सब एक जैसे हैं, बड़ाई का पैमाना और मेयार सिर्फ़ तक़वा और परहेज़गारी है। क्यो कि क़ुरआने मजीद में इरशाद होता है:
ان اکرمکم عندالله اتقاکم
बेशक ख़ुदा के नज़दीक तुम में से सब से ज़्यादा इज़्ज़त और फ़ज़ीलत वाला वह है जो सब से ज़्यादा मुत्तक़ी (परहेज़गार) हो। (सूर ए हुजरात आयत 13)
* ख़ुदा आदिल है यानी किसी के छोटे से छोटे कार्य को भी बेकार नही जाने देता। क़ुरआने मजीद में इरशाद है:
فمن یعمل مثقال ذرة خیرا یره ومن یعمل مثقال ذرة شرا یره
जो ज़र्रा बराबर भी नेकी करेगा उस की जज़ा (ईनाम) पायेगा और जो ज़र्रा बराबर भी बुराई करेगा उस की सज़ा पायहगा।
ईश्वरीय अदल (न्याय) की दलील
ख़ुदा आदिल है और वह ज़ुल्म नही करता। इस लिए कि ज़ुल्म एक बुरा काम और ऐब है और ख़ुदा हर ऐब से पाक है, दूसरी बात यह कि ज़ुल्म करने के बहुत से सबब (कारण) होते हैं जिन में से एक भी ख़ुदा में नही पाया जाता और वह असबाब (कारण) यह हैं:
1 जिहालत: ज़ुल्म वह करता है जो उस की बुराई को न जानता हो जब कि ख़ुदा हर चीज़ के बारे में जानता है।
2. आवश्यकता: ज़ुल्म वह करता है जो किसी चीज़ का मोहताज हो और उस चीज़ को हासिल करने के लिए उसे ज़ुल्म का सहारा लेना पड़े। लेकिन ख़ुदा किसी चीज़ का मोहताज नही है।
3. आजिज़ी: ज़ुल्म वह करता है जो ख़ुद से किसी ख़तरे को टालने में बेबस हो और आख़िर कार उसे ज़ुल्म का सहारा लेना पड़े। लेकिन ख़ुद आजिज़ और बेबस नही है बल्कि हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।
4 दुर्वयव्हारी: ज़ुल्म वह करता है जो बुरा व्यवहार रखता हो और अपने दिल में किसी की दुश्मनी लिये बैठा हो या किसी से जलता हो लेकिन ख़ुदा इन सब बुराईयों से पाक है।
इन ही चार असबाब में से किसी एक सबब की बुनियाद पर दुनिया में ज़ुल्म होते हैं लेकिन ख़ुदा वंदे आलम में इन में से एक सबब भी नही पाया जाता लिहाज़ा साबित हो जाता है कि ख़ुदा वंदे आलम ज़ालिम नही बल्कि आदिल (इंसाफ़ वाला) है।
सारांश
- अल्लाह तआला आदिल (न्याय प्रिय) है और किसी पर ज़ुल्म नही करता।
- ख़ुदा के अद्ल का मतलब यह है कि वह तमाम काम मसलहत व हिकमत की बुनियाद पर करता है, उस की नज़र में सारे इंसान बराबर है।
- दुनिया में ज़ुल्म के चार असबाब हैं: जिहालत, ज़रुरत, आजिज़ी (बेबसी), बद अख़लाक़ी, लेकिन ख़ुदा वंदे आलम में इन में से कोई एक सबब भी नही पाया जाता लिहाज़ा साबित हो जाता है कि ख़ुदा आदिल (इंसाफ़ वाला) है।
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