ईरान और मराजे न होते तो इराक़ हार चुका होता

अब्बास अलबयाती

इराकी संसद की विदेश नीति आयोग के एक सदस्य ने क्षेत्र में ईरान के गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहाः ईरान एक बड़ा रणनीतिक देश है और अगर ईरान, मराजे का फ़तवा और स्वंयसेवी बल हश्द अलशअबी ने होते तो इराक़ आतंकवादियों से युद्ध हार गया होता।

टीवी शिया अब्बास अलबयाती ने लेबनान की न्यूज़ साइट अलअह्द से कहाः ईरान के साथ बेहतर तालमेल क्षेत्र की सुरक्षा को मज़बूत बनाता है।

उन्होंने इराक़ द्वारा आतंकवादियों से जारी युद्ध में ईरान के समर्थन की प्रशंसा करते हुए कहाः क्षेत्रीय समीकरणों में ईरान केन्द्रीय हैसियत रखता है।

अलबयाती ने विदेशों से आए बलों का इराक़ में कुछ इराक़ियों द्वारा स्वागत किये जाने और हश्द अलशअबी को स्वीकार न करने पर निराशा जताई और उन्होंने कहाः इराक़ ने आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में दुनिया के सामने अपनी शक्ति को दिखा दिया है।

अलबयाती ने आतकंवाद के विरुद्ध लड़ाई में इराक़ की और अधिक सहायता किये जाने का अनुरोध करते हुए कहाः ईरान वह पहला देश था जिसने दाइश के विरुद्ध लड़ाई में इराक़ की सहायता की आवाज़ पर हां में जवाब दिया था।

उन्होंने कहाः हश्द अलशअबी राष्ट्रीय और इराक़ का आधिकारिक बल है और हमारा प्रयत्न है कि स्वंयसेवी बलों के बलिदानों और उनके अधिकारों की पूर्ति के लिये क़ानून पास कराएं।

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