गैबत और हमारी जिम्मेदारियां इमाम ज़माना की हदीसों में
गैबत और हमारी जिम्मेदारियां इमाम ज़माना की हदीसों में
ताज़दार हुसैन ज़ैदी
इमाम जम़ाना (अ) की ग़ैबत का मामला ऐसा है जिसके बारे में हर इंसान जानना चाहता है और हर अहलेबैत का चाहने वाला बल्कि अत्याचारों से पीड़ित हर इंसान चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो दुनिया के न्याय से भर देने वाले का इन्तेजार कर रहा है, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इन्तेज़ार का अर्थ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना है या हमको चाहिए कि हम कुछ ऐसे कार्य करें जो हमारे और हमारे ज़माने के इमाम के बीच की दूरियों को कम करे, हम अपने इस संक्षिप्त से लेख में इमाम ज़माना (अ) की हदीसों के माध्यम से यह बता रहे हैं कि ग़ैबत के ज़माने में हमारी क्या ज़िम्मेदारिया हैं और हमें क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये।
हमारी मोहब्बत पाने की कोशिश करो
1. قال المَهدي(عج): فليعمل كل امرئ منكم بما يقرب به من محبتنا ، ويتجنب ما يُدنيه من كراهيتنا وسخطنا.
इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : तो तुम में से हर एक (शिया) पर है कि हर वह कार्य करे जो उसको हमारी मोहब्बत से करीब करे और हर उस कार्य से दूर रहे जो उसको हमारे क्रोध और नाराज़गी से क़रीब करे।
(बिहारुल अनवार जिल्द 53, पेज 167)
नमाज़ पढ़ो
2. قال المَهدي(عج): فما أُرغِم أنف الشيطان بشيءٍ مثل الصلاة ، فصلّها وأَرغم أنف الشيطان
इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : कोई भी चीज़ नमाज़ की तरह शैतान की नाक को ज़मीन पर नहीं रगड़ती है तो नमाज़ पढ़ो और शैतान को ज़लील करो।
(एहतेजाजे तबरेसी, जिल्द 2, पेज 298)
अपनी सीमाओं का ध्यान रखो
3. قال المَهدي(عج): فاتّقوا الله، وسلّموا لنا، ورُدّوا الأمر إلينا، فعلينا الإصدار، كما كان مِنّا الإيراد، ولا تحاولوا كشف ما غُطِّيِ عنكم، واجعلوا قَصدَكم إلينا بالمودّة على السنّة الواضحة فقد نصحت لكم، والله شاهد عليّ وعليكم.
इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : तक़वा अख़्तियार करो और हमारे आदेशों का पालन करो, और कार्यों को हम पर छोड़ दो, जिस प्रकार अहकाम और मआरिफ़ का बयान हमारे ज़िम्मे है, फ़तवा देना और वास्तविक्ताओं का बयान करना हमारी जिम्मेदारी है, और जो कुछ तुम से छिपा है उसकी खोजबीन न करो, और दाहिने या बाएं न जाओ (सीधे रास्ते पर रहो) और अपनी मुहब्बत और दोस्ती को वाज़ेह सुन्नत के साथ हमको पलटा दो (मुहब्बत में सच्चे रहो) मैंने तुमको वसीयत की और अल्लाह मुझ पर और तुम पर गवाह है।
(बिहारुल अनवार जिल्द 53, पेज 179)
अपने जीवन का मक़सद समझो
4. قال المَهدي(عج): إنَّ اللّه َ تَعالى لَمْ يَخْلُقِ الْخَلْقَ عَبَثاً ولا أهْمَلَهُمْ سُدىً، بَلْ خَلَقَهُمْ بِقُدْرَتِهِ وَ جَعَلَ لَهُمْ أسْماعاً وَ أبْصاراً وَ قُلُوباً وَ ألْباباً، ثُمَّ بَعَثَ اِلَيْهِمُ النَبيّينَ عليهم السلام مُبَشِّرِينَ وَ مُنْذِرينَ ،يأمُرُونَهُمْ بِطاعَتِهِ، وَ يَنهُونَهُمْ عَنْ مَعْصيَتِهِ، وَ يُعَرِّفُونَهُمْ ما جَهِلُوهُ مِنْ أمْرِ خالِقِهِمْ وَ دِينِهِمْ و انزل علیهم کتابـا
इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : निःसंदेह अल्लाह ने लोगों को बेकार नहीं पैदा किया है और उनके उन्हीं पर नहीं छोड़ दिया है बल्कि अपनी शक्ति से उनको पैदा किया और उनको कान, आँखें दिल और दिमाग़ दिया (ताकि हक़ाएक़ को समझें) फिर पैग़म्बरों को उनकी तरफ़ भेजा जब्कि वह लोगों को अल्लाह की नेमतों की खुशख़बरी दे रहे थे और उसके क्रोध एवं अज़ाब से डरा रहे थे और उसके आदेशों की अवहेलना से रोकते थे, और वह जो कुछ अपने पैदा करने वाले के बारे में नहीं जानते थे उसके बताते थे और ख़ुदा ने उन पर किताब नाज़िल की। (यह सारी चीज़ें की गई ताकि इंसान अपने पैदा किए जाने के मक़सद को समझे)
(बिहारुल अनवार जिल्द 53, पेज 194)
अच्छे कार्य में बुरा कहने वालों से न डरो
5. قال المَهدي(عج): إنَّ اللّهَ مَعَنا ، فَلا فاقَةَ بِنا إلى غَيرِهِ و الحَقُّ مَعَنا فَلَن يُوحِشَنا مَن قَعَدَ عَنّا
इमाम महदी फ़रमाते हैं ख़ुदा हमारे साथ है, हमको किसी दूसरे की आवश्यकता नहीं है, और हक़ हमारे साथ है, और कोई डर नहीं है को कोई हमसे मुंह मोड़ ले।
(अलग़ैबा, शेख़ तूसी, पेज 285)
नमाज़ में देरी न करो
6. قال المَهدي(عج): ملعون ملعون من اخر العشاء الی ان تشتبک النجوم ملعونٌ ملعونٌ من أخّر الغداة إلى أن تنقضي النجوم.
इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : मलऊन है मलऊन है वह जो मगरिब और इशा की नमाज़ में इतनी देर करे कि आसमान के सारे सितारे दिखने लगें, और मलऊन है मलऊन है वह जो सुबह की नमाज़ में इतनी देरी करे कि सितारे छिप जाएं।
(बिहारुल अनवार जिल्द 52, पेज 15)
नई टिप्पणी जोड़ें