हिजाब हज़रत फ़ातेमा (स) की हदीसों में

हिजाब हज़रत फ़ातेमा (स) की हदीसों में

बुशरा अलवी

یا أَیُّهَا النَّبِیُّ قُلْ لِأَزْواجِکَ وَ بَناتِکَ وَ نِساءِ الْمُؤْمِنینَ یُدْنینَ عَلَیْهِنَّ مِنْ جَلاَبِیبِهِنَّ ذلِکَ أَدْنی‏ أَنْ یُعْرَفْنَ فَلا یُؤْذَیْنَ

ऐ नबी! अपनी पत्नी यों और अपनी बेटियों और ईमान वाली स्त्रियों से कह दो कि वे अपने ऊपर अपनी चादरों का कुछ हिस्सा लटका लिया करें। इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि वे पहचान ली जाए और सताई न जाए। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है

(सूरा अहज़ाब आयत 59)

قالَتْ فاطِمَةُ الزَّهْراء - سلام الله عليها - :

1. إنّي قَدِاسْتَقْبَحْتُ ما يُصْنَعُ بِالنِّساءِ، إنّهُ يُطْرَحُ عَلي الْمَرْئَةِ الثَّوبَ فَيَصِفُها لِمَنْ رَأي، فَلا تَحْمِليني عَلي سَرير ظاهِر، اُسْتُريني، سَتَرَكِ اللّهُ مِنَ النّارِ ؛

आपने अपने जीवन के अंतिम दिनों में असमा को वसीयत करते हुए फरमायाः मैं इस बात को बहुत बुरा समझती हूँ कि मौत के बाद महिलाओं के जनाज़े को उसके शरीर पर एक कपड़ा डाल कर उठाते हैं और लोग उसकी शारीरिक बनावट को देखते हैं और दूसरों को बताते हैं, मुझे उस तख़्त पर न उठाना जो खुला हो, मुझे पूर्ण रूप से ढक कर उठाना ईश्वर तुमको नर्क की आग से बचाए।

(तहज़ीबुल अहकाम जिल्द 1, पेज 429)

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2. قالَتْ علیه السلام : خَیْرٌ لِلِنّساءِ انْ لایَرَیْنَ الرِّجالَ وَلایَراهُنَّ الرِّجالُ.

आप फ़रमाती हैं महिलाओं के लिये सबसे बेहतरीन चीज़ यह है कि वह किसी (नामहरम) मर्द को न देखे और न कोई मर्द उसको देखे।

(बिहारुल अनवार जिल्द 43, पेज 54 हदीस 48)

3. قالَتْ علیها السلام : .... إنْ لَمْ یَكُنْ یَرانى فَإنّى اراهُ، وَ هُوَ یَشُمُّ الریح.

एक अंधा व्यक्ति ने घर में प्रवेश किया तो हज़रते ज़हरा ने स्वंय को उससे छिपा लिया, जब पैग़म्बर ने कारण पूछा तो फ़रमायाः अगर वह अंधा मुझे नहीं देख सकता है तो क्या मैं तो उसे देख सकती हूँ, और वह बू को सूँघ सकता है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 43, पेज 91, हदीस 16)

4. عَنْ فاطِمَةَ الزَّهْراءِ(علیها السلام) قالَتْ: سَأَلَ رَسُولُ اللّهِ(صلى الله علیه وآله وسلم)أَصْحابَهُ عَنِ الْمَرْأَةِ ماهِىَ؟ قالُوا: عَوْرَةٌ، قالَ: فَمَتى تَكُونُ أَدْنى مِنْ رَبِّها؟ فَلَمْ یدْرُوا. فَلَمّا سَمِعَتْ فاطِمَةُ(علیها السلام) ذلِكَ قالَتْ: أَدْنى ما تَكُونُ مِنْ رَبِّها أَنْ تَلْزَمَ قَعْرَ بَیتِها. فَقالَ رَسُولُ اللّهِ(صلى الله علیه وآله وسلم): إِنَّ فاطِمَةَ بَضْعَةٌ مِنّى.

आपने फ़रमाया कि पैग़म्बर इस्लाम (स) ने अपने सहाबियों के पूछाः औरत क्या है? उन्होंने कहाः नामूस जिसको छिपा कर रखा जाए। आपने फ़रमायाः कब वह अपने अल्लाह से सबसे अधिक क़रीब होती है? सहाबी कोई उत्तर न दे सके। जब फ़ातेमा ज़हरा (स) ने यह सुना तो फ़रमायाः औरत अपने अल्लाह से सबसे क़रीब तब होती है जब वह अपने घर में होती है।

पैग़म्बर ने जब यह उत्तर सुना तो फ़रमायाः निःसंदेह फ़ातेमा मेरा टुकड़ा है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 100, पेज 251)

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