इमाम सादिक़ (अ) की संक्षिप्त जीवनी
इमाम सादिक़ (अ) की संक्षिप्त जीवनी
नाम एवं उपाधि
हज़रत इमाम सादिक़ (अ) का नाम जाफ़र व आपका मुख्य लक़ब सादिक़ है।
माता पिता
हज़रत इमाम सादिक़ (अ) के पिता हज़रत इमाम हज़रत इमाम बाक़िर (ِअ) व आपकी माता हज़रत उम्मे फ़रवा पुत्री क़ासिम पुत्र मुहम्मद पुत्र अबु बकर हैं।
जन्म तिथि व जन्म स्थान
हज़रत इमाम सादिक़ (अ) का जन्म सन् 83 हिजरी के रबी उल अव्वल महीने की 17वी तिथि को पवित्र शहर मदीने में हुआ था।
स्वर्गवास
हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत सन् 148 हिजरी क़मरी में शव्वाल मास की 25वी तिथि को हुई। अब्बासी शासक मँनसूर दवानक़ी के आदेशानुसार आपको विष दिया गया जो आपकी शहादत का कारण बना।
समाधि
हज़रत इमाम सादिक़ (अ) को पवित्र शहर मदीने के जन्नतुल बक़ी नामी क़ब्रिस्तान में दफ़्न किया गया है और वर्तमान में वहीं आपकी समाधि है। यह शहर वर्तमान समय में सऊदी अरब में है।
इमाम सादिक (अ) उलेमा की निगाह में
अबु हनीफ़ा
सुन्नी समुदाय के प्रसिद्ध विद्वान अबु हनीफ़ा कहते हैं कि मैं ने हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से बड़ा कोई विद्वान नहीं देखा। वह यह भी कहते हैं कि अगर मैं हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्लाम से दो साल तक ज्ञान प्राप्त न करता तो हलाक हो जाता। अर्थात उन के बिना कुछ भी न जान पाता।
इमाम मालिक
सुन्नी सम्प्रदाय के प्रसिद्ध विद्वान इमाम मालिक कहते हैं कि मैं जब भी हज़रत इमाम सादिक़ के पास जाता था उनको इन तीन स्थितियों में से किसी एक में देखता था। या वह नमाज़ पढ़ते होते थे, या रोज़े से होते थे, या फिर कुरआन पढ़ रहे होते थे। वह कभी भी वज़ू के बिना हदीस का वर्णन नहीं करते थे।
इब्ने हजर हीतमी
इब्ने हजरे हीतमी कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से ज्ञान के इतने स्रोत फूटे कि आम जनता भी उनके ज्ञान के गुण गान करने लगी। तथा उनके ज्ञान का प्रकाश सब जगह फैल गया। फ़िक्ह व हदीस के बड़े बड़े विद्वानों ने उनसे हदीसें नकल की है।
अबु बहर जाहिज
अबु जाहिज़ कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ वह महान् व्यक्ति हैं जिनके ज्ञान ने समस्त संसार को प्रकाशित किया। कहा जाता है कि अबू हनीफ़ा व सुफ़याने सूरी उनके शिष्यों में से थे। हज़रत इमाम सादिक़ का इन दो विद्वानों का गुरु होना यह सिद्ध करता है कि वह स्वंय एक महानतम विद्वान थे।
इब्ने ख़ल्लकान
प्रसिद्ध इतिहासकार इब्ने ख़ल्लकान ने लिखा है कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम शियों के इमामिया सम्प्रदाय के बारह इमामों में से एक हैं। व हज़रत पैग़म्बर (स) के वंश के एक महान व्यक्ति हैं। उनकी सत्यता के कारण उनको सादिक़ कहा जाता है। (सादिक़ अर्थात सत्यवादी) उनकी श्रेष्ठता व महानता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। अबूमूसा जाबिर पुत्र हय्यान तरतूसी उनका ही शिष्य था।
शेख मुफ़ीद
शेख मुफ़ीद कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने ज्ञान को इतना अधिक फैलाया कि वह जनता में प्रसिद्ध हो गये। व उनके ज्ञान का प्रकाश सभी स्थानों पर पहुँचा।
नई टिप्पणी जोड़ें