ओबामा तुर्क राष्ट्रपति उर्दोग़ान को मरा हुआ देखना चाहते थे!

ओबामा और उर्दोग़ान

एक अमरीकी लेखक ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब उर्दोग़ान के विरुद्ध विफ़ल तख़्तापलट में अमरीका का हाथ होना बताया है।

अमरीकी लेखक और विश्लेषक बेल फ़ान ओशेन ने वेबसाइट WSWS पर तुर्की में विफ़ल तख़्तापलट की कोशिशों में अमरीका समर्थित उच्च अधिकारियों और एन्जरलीक एयर बेस के कमांडर का हाथ होने की बात कही है।

एन्जरलीक यूरोप और क्षेत्र में अमरीका के परमाणु हथियारों का सबसे बड़ा अड्डा माना जाता है और यहीं से आतंकवादी संगठन दाइश के विरुद्ध अमरीकी गठबंधन सेनाएं इराक़ और सीरिया में हमले कर रही है।

बता दें कि तुर्की में तख़्तापलट की कोशिशों के विफ़ल होने के बाद ही एन्जरलीक एयर बेस के कमांडर ने अमरीका में राजनीतिक शरण के लिये अर्ज़ी दी है।

शाम न्यूज़ के अनुसार ओशेन ने लिखाः मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि रूस ने तख़्तापलन करने वालों की वायरसेल पर की जाने वाली कुछ बातों को डीकोड कर दिया था और उन्होंने तुर्की के ख़ुफ़िया विभाग को इसकी जानकारी दी था जिसके बाद तख़्तापलट करने वालों के उर्दोग़ान के आवास पर पहुँचने से आधा घंटा पहले ही वह भाग निकलने में कामयाब हो सके थे।

इस लेखक के अनुसार यह बात स्वीकार नहीं की जा सकती है कि तमाम टेक्नालोजी, सेना के वहां मौजूद होने के बावजूद अमरीका को तख़्तापलट की पहले से जानकारी न हो।

उन्होंने लिखाः लेकिन सारी जानकारी होने के बावजूद अमरीका ने तुर्की को हालात की जानकारी क्यों नहीं दी इसका एक ही कारण हो सकता है और वह यह है कि ओबामा उर्दोग़ान को सावधान नहीं करना चाहते थे और वह उर्दोग़ान को मरा हुआ देखना चाहते थे।

जिस समय तुर्की में तख़्तापलट की कोशिश हुई है उस समय अमरीके के विदेशमंत्री जान कैरी मैक्सिको में थे और उन्होंने इस तख़्तापलट पर अमरीका की पहली प्रतिक्रिया के तौर पर उर्दोग़ान के भविष्य के बारे में बिना कुछ कहे सिर्फ यह कहा था कि अमरीका तुर्की में शांति देखना चाहता है, यहां तक कि अमरीका ने चुनाव के माध्यम से चुनी जाने वाली सरकार के बाक़ी रहने की आवश्यकता के बारे में भी कुछ नहीं कहा था।

अमरीकी लेखक के अनुसार उर्दोग़ान ने तख़्तापलट को विफल बनाने के बाद अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा से बात करने से बहुत पहले रूस के राष्ट्रपति पुतीन से टेलीफोन पर बात की थी जो रूस के सिलसिले में तुर्की के बदलते दृष्टिकोण को दिखाता है। यहां तक की उर्दोग़ान ने ईरान के राष्ट्रपति रूहानी से भी बात की।

ओशेन का मानना है कि अमरीकी साम्राज्य क्षेत्र में बदलते राजनीतिक हालात को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है और यही कारण है कि उसने तुर्की में तख़्तापलट करवाने की कोशिश की और अगर तुर्की में यह कोशिश सफ़ल हो जाती तो पूरा तुर्की गृह युद्ध में आग में जल उठता।

इस अमरीकी लेखक के अनुसार अमरीकी रवय्ये को इससे समझा जा सकता है कि तुर्की में तख़्तापलट की नाकामी को अमरीका ने डेमोक्रेसी की सफ़लता नहीं माना है बल्कि अमरीका का मानना है कि उर्दोग़ान इस मौक़े से फ़ायदा उठाएंगे और दक्षिणपंथीयों की डिक्टेटरशिप को मज़बूत करेंगे, और अपने विरोधियों का दमन करेंगे।

नई टिप्पणी जोड़ें