हिज़्बुल्लाह कमांडर की हत्या में इस हथियार का किया गया प्रयोग
हिज़्बुल्लाह के कमांडर शहीद मुस्तफ़ा बदरुद्दीन की सीरिया में शहादत के कुछ दिन के बाद ही उनको शहीद करने वाले हथियार के बारे में रिपोर्ट जारी हुई है
टीवी शिया प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि हिज़्बुल्लाह के कमांडर मुस्तफ़ा बदरुद्दीन को गुरुवार की रात को उस समय निशाना बनाया गया कि जब वह दमिश्क़ एयरपोर्ट के पास स्थित हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर उनकी एक बैठक समाप्त हुई थी।
लेबनान के समाचार पत्र अलअख़बार के अनुसार मुस्तफ़ा के अधिकतर साथी उनसे दूर हो चुके थे और वह अभी मुख्यालय के सहन में ही थे कि एक भयानक धमाका हुआ जिसके बारे में पता चला ह कि यह एक अत्यधिक उन्नत निर्देशित मिज़ाइल से किया गया था जो मुस्तफ़ा बदरुद्दीन से दो मीटर की दूरी पर गिरा था।
इस मीज़ाइल की कार्य करने की शैली वैक्यूम बम की भाति थी कि जिसमें टारगेट के शरीर पर छर्रे लगने के बजाए उसके शरीर के अंदर धमाका होता है। शहीद बदरुद्दीन के पार्थिव शरीर को अस्पताल ले जाने के बाद पता चला के उनको पेट और गर्दन पर कुछ बहुत ही छोटे छर्रे लगे थे लेकिन ख़ून उनकी आखों और नाक से निकल रहा था जो बताता है कि उनके शरीर के भीतरी अंगों पर कितना अधिक दबाव था।
मौजूद जानकारियों के अनुसार इस प्रकार की मीज़ाइल को मोटार्र के विरुद्ध किसी छोटे लांच पैड से लांच नहीं किया जा सकता है, और ऐसा लगता है कि इस अत्याधुनिक मीज़ाइल को क्षेत्रीय सैन्य शक्तियों ने सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठनों की ख़ुफिया जानकारी के अनुसार छोड़ा था।
स्पष्ट रहे कि लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन ने शुक्रवार को एक बयान जारी करके कहा था कि उसके एक वरिष्ठ कमांडर मुस्तफ़ा बद्रुद्दीन सीरिया में इस्राईल के हाथों शहीद हो गए हैं। वे दमिश्क़ हवाई अड्डे के निकट अपने निवास स्थान पर ज़ायोनी शासन के हमले में शहीद हुए। वे हिज़्बुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर एमाद मुग़निया के क़रीबी रिश्तेदार और उनके उत्तराधिकारी थे। अमरीका, ब्रिटेन और इस्राईल की गुप्तचर संस्थाएं तीस साल से उनके पीछे पड़ी हुई थीं। हिज़्बुल्लाह में उन्हें ज़ुल्फ़ेक़ार के नाम से भी जाना जाता था।
इससे पहले भी समीर क़ंतार सहित लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के कई सदस्य व कमांडर, जो तकफ़ीरी आतंकियों से लड़ने के लिए सीरिया गए हुए थे, ज़ायोनी शासन के हवाई हमलों में शहीद हो चुके हैं। सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने कहा भी है कि जब भी सीरियाई या प्रतिरोधक बल, क्षेत्र के कुछ अरब व पश्चिमी देशों तथा इस्राईल के समर्थन प्राप्त आतंकियों के मुक़ाबले में बड़ी विजय हासिल करने वाले होते हैं, उन पर इस्राईल हमला कर देता है।
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