इमाम ज़माना की इमामत और नया साल एक साथ, अदिर्तीय संयोग

इस नये साल यानी 2015 में एक  बहुत ही महत्वपूर्ण संयोग हुआ है, और वह यह है कि जिस दिन नया साल आरम्भ हुआ है उसी दिन इस संसार के अन्तिम इमाम यानी इमाम ज़माना की इमामत का भी आग़ाज़ हुआ है, आठ रबीउल अव्वल को इमाम हसन (अ) की शहादत के बाद 9 रबीउल अव्वल से इमाम ज़माना की इमामत आरम्भ हुई है।

टीवी शिया इमामत का मसअला इतना महत्वपूर्ण मसअला है कि हदीसों में पैग़म्बरे इस्लाम से आया है कि जिसने अपने ज़माने के इमाम को नही पहचाना उनकी मौत जाहेलीयत यानी कुफ़्र की मौत है।

इस शुभ अवसर पर हम अपने तमाम पाठकों को शुभकामनाएं पेश करते हैं, और ईश्वर से इमाम ज़माना के ज़ोहूर की प्रार्थना करते हैं।

اللهم عجل لولیک الفرج

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