महिलाओं की गिरफ़्तारी, आले ख़लीफ़ा सरकार की नई चाल!

महिलाओं की गिरफ़्तारी एक नई राजनीतिक चाल है जिससे बहरैन की जनता पर दबाव डाला जा सके और इस प्रकार जनता को व्यवस्था और संसदीय चुनावों में समिलित होने पर मजबूर किया जा सके.

(बहरैन) टीवी शिया बहैरन मानवाधिकार संगठन ने इस देश में गिरफ़्तार की गईं सारी महिलाओं की आज़ादी की मांग की है और कहा है कि गिरफ़्तार किये जाते समय इनके साथ होने वाले बुरे व्यवहार, पूछताछ करते समय वकीलों के आने की अनुमति न दिये जाने और अचानक घर पर रेड डालने की जांच की जानी चाहिए ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 नवम्बर से पिछले शुक्रवार तक बहरैन कि विभिन्न क्षेत्रों से अब तक 14 महिलाओं के गिरफ़्तार किया जा चुका है, और वकील की अनुपस्थिति में ही उनसे पूछताछ और जेल की सज़ा सुनाई गई हैं, और उनको शारीरिक एवं मानसिक यातनाएं दी गई हैं।

इस संगठन ने अपने बयान में कहा हैः महिलाओं की गिरफ़्तारी एक नई राजनीतिक चाल है जिससे बहरैन की जनता पर दबाव डाला जा सके और इस प्रकार जनता को व्यवस्था और संसदीय चुनावों में समिलित होने पर मजबूर किया जा सके, बहरैन के आले ख़लीफ़ा बादशाह ने 22 नवम्बर को संसदीय चुनाव की घोषणा की है।

स्पष्ट रहे कि बहरैन के शियों ने आले ख़लीफ़ा सरकार द्वारा जनता के अधिकारों की अनदेखी, उनका दमन करने के कारण संसदीय चुनावों के बहिष्कार की बात कही है।

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