सऊदी अरब में शियों का समर्थन पड़ा भारी, सुन्नी कार्यकर्ता को 5 साल की सज़ा
जनवरी 2014 में उनको 5 साल की जेल, देश से बाहर जाने पर रोक, लेख लिखने पर रोक और मीडिया एवं इन्टरनेट पर जाने पर रोक लगाई गई थी।
टीवी शिया सऊदी अरब के प्रसिद्ध सक्रिय सुन्नी कार्यकर्ता मुख़लफ़ अल शमरी को शियों की हिमायत करना और उनसे साथ सौहार्द से रहने के लिये कहना मंहका पड़ा और उनको जेल की हवा खानी पड़ी, और यह घटना उस समय हुई है कि जब सऊदी अरब के मौलवियों ने अहसा के इमामबाड़े पर आतंकवादी हमले में कई शियों के मारे जाने के बाद शियों के साथ सौहार्द से रहने की अपील की थी।
मुख़लफ़ अल शमरी जो कि मानवाधिकारों के बहुत बड़े समर्थक है को अब तक कई बार जेल जाना पढ़ा है, अंतिम बार जनवरी 2014 में उनको 5 साल की जेल, देश से बाहर जाने पर रोक, लेख लिखने पर रोक और मीडिया एवं इन्टरनेट पर जाने पर रोक लगाई गई थी।
उन्होने इससे पहले भी कहा था कि मैं सऊदी अरब में शिया और सुन्नी एकता के लिये अपनी जान देने के लिये तैयार हूँ।
उनको सज़ा सुनाये जाने पर कई मानवाधिकार संगठनों और सऊदी अरब एवं फ़ारस की खाड़ी के ह्यूवम राइट्स वाच ने निंदा की है।
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