इमाम महदी अलैहिस्सलाम का परचम

इमाम महदी अलैहिस्सलाम का परचम

हाफ़िज़ क़ंदूज़ी की यनाबीऊल मवद्दत में नौफ़ से रिवायत है वह बयान करता है इमाम महदी के परचम पर लिखा होगाالبیعة لله  यानी बैअत सिर्फ़ अल्लाह के लिये मख़्सूस है।[1]

मुत्तक़ी हिन्दी इब्ने उमर से रिवायत से करते हैं कि आँ हज़रत ने अली का हाथ अपने हाथों में लिया और फ़रमाया अली के सुल्ब से एक जवान ज़ाहिर होगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा पस जिस वक़्त तुम यह देखो तो तुम तमीमी जवान के साथ हो जाना इसलिये कि यह शख़्स मशरिक़ वारिद होगा और महदी का अलमबरदार होगा।

रिवायत की गयी है कि इमाम हसन असकरी(अ) के यहाँ एक बच्चे की विलादत हुई पस उन्होने उस बच्चे का नाम मुहम्मद रखा और तीसरे रोज़ अपने असहाब के सामने लाये और फ़रमाया यह मेरे बाद तुम्हारा इमाम और तुम पर मेरा ख़लीफ़ा है। यह वह क़ायम है जिसके इन्तेज़ार में गर्दने लंबा हो जायेगीं पस जिस वक़्त ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी उस वक़्त ज़हूर करेगा और उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा।

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(1) बैअत बैअ के मानी में है जिसके मायना फ़रोख़्त करने के हैं, बैअत को बैअत इसलिये कहा गया है कि बैअत करने वाला अपने नफ़्स और जान को फ़रोख़्त करता है और जंग व सुल्ह और क़ज़ा के लिये और हर एक हुक्म और नबी के लिये हर वक़्त आमादा रहता है। इमाम मेहदी के परचम पर البیعة لله  यानी बैअत फ़कत अल्लाह के लिये है, इसका मतलब यह है कि मेहदी ख़ुदा की जानिब से उसके नायब हैं। और जिनकी बैअत करना ख़ुदा से बैअत करने के मुतारादिफ़ है और यह बैअक उसी बैअक की ताकीद है जो मोमीनीन की जानिब से क़ुरआने हकीम में वारिद हुई है। मसलन ख़ुदा वंदे आलम इरशाद फ़रमाता है:

إِنَّ اللّهَ اشْتَرَى مِنَ الْمُؤْمِنِينَ أَنفُسَهُمْ وَأَمْوَالَهُم بِأَنَّ لَهُمُ الجَنَّة    

ख़ुदा ने ख़रीद लिया है बाज़ मोमीनीन की जान और अमवाल को जन्नत के बदले

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