आ रही है यह सदा ज़ैनबे दिलगीर की

आ रही है यह सदा ज़ैनबे दिलगीर की
लाश है बे गोरो कफ़न दश्त में शब्बीर की
आ रही है....

 

अब नहीं अब्बासे ग़ाज़ी क़ासिमो अकबर कहां
हाय अब कोई उठाए लाश बे तक़सीर की
आ रही है....

 

कर दिया क़ुरआन ज़ख़्मी हुरमुला के तीर ने
जानते न थे मुसलमां अज़मतें बे शीर की
आ रही है....

 

आ गई उम्मत नबी की आग लेकर हाथ में
लाज रख लेना ख़ुदाया चादरे ततहीर की
आ रही है....

 

सर दिया गुलज़ार जब इस्लाम पर शब्बीर ने
खून के क़तरों ने फिर ख़ाके शिफ़ा अकसीर की
आ रही है....

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