पाँचवें इमाम की पाँच नसीहतें

पाँचवें इमाम की पाँच नसीहतें

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि मै तुमको पाँच बातों के लिए नसीहत करता हूँ।

(1) अगर तुम पर अत्याचार किये जायें तो तुम अत्याचार न करो

(2) अगर तुम्हारे साथ विश्वासघात किया जाये तो तुम विश्वासघात न करो।

(3) अगर तुमको झूटा कहा जाये तो क्रोधित न हो।

(4) अगर तुम्हारी प्रशंसा की जाये तो प्रसन्न न हो।

(5) अगर कोई तुम्हारी भर्त्सना करे तो विवेक से काम लो।

पाप से बचना

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उस समय पाप से सुरक्षित नही रह सकता जब तक वह अपनी ज़बान को क़ाबू मे न रखे।

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो सत्य बोलता है उसके कार्य पवित्र होते हैँ।

और जिसके विचार पवित्र होते हैं वह धनी होता है।और जो अपने परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करता है उसकी आयु बढ़ा दी जाती है।

आलस्य से दूर रहो

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि आलस्य व कम दिली से बचों क्योंकि यह दोनो समस्त बुराईयों की जड़ हैं।

जो आलस्य करेगा वह दूसरो के अधिकारों की पूर्ति नही कर पायेगा। व जो तंग दिल होगा वह हक़ पर सब्र नही कर सकेगा।

न्याय

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि परलय के दिन वह व्यक्ति बहुत अधिक पछताऐंगे जो संसार मे न्याय की प्रशंसा करते थे परन्तु स्वंय न्याय पूर्वक कार्य नही करते थे।

अगर मोमिन हो तो

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह के अतिरिक्त किसी दूसरे को अपना राज़दार न बनाओ और न अल्लाह के अतिरिक्त किसी पर भरोसा करो। क्योंकि कुऑन मे वर्णित आश्यों के अतिरिक्त सम्बन्धों के समस्त स्रोत व राज़ अल्लाह की दृष्टि मे अमान्य हैं।

मोमिन मोमिन का भाई

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि मोमिन मोमिन का भाई है। न वह उसे गाली देता है न उसे किसी वस्तु से वाँछित करता है।

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