हज़रते सिद्दीक़-ए- ताहेरा (स) के कथन
हज़रते सिद्दीक़-ए- ताहेरा (स) के कथन
1--नरकीय स्त्रीयां
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.) ने कह कि पैगम्बर ने कहा कि मैने शबे मेराज (रजब मास की 27वी रात्री जिस मे पैगम्बर आकाश की यात्रा पर गये थे) नरक मे कुछ स्त्रीयों को देखा उन मे से एक को सिर के बालों द्वारा लटका रक्खा था और इस का कारण यह था कि वह संसार मे गैर पुरूषों(परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त अन्य पुरूष) से अपने बालों को नही छुपाती थी। एक स्त्री को उसकी जीभ के द्वारा लटकाया हुआ था। तथा इस का कारण यह था कि वह अपने पति को यातनाऐं देती थी। एक स्त्री का सिर सुअर जैसा और शरीर गधे जैसा था तथा इस का कारण यह था कि वह चुगली किया करती था ।
2-रोज़ेदार
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति रोज़ा रखे परन्तु अपनी ज़बान अपने कान अपनी आँख व शरीर के दूसरे अंगों को हराम कार्यों से न बचाये तो ऐसा है जैसे उसने रोज़ा न रखा हो।
3- सर्व प्रथम मुसलमान
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने मुझसे कहा कि तेरे पति सर्व प्रथम मुसलमान हैं। तथा वह सबसे अधिक बुद्धिमान व समझदार है।
4- पैगम्बर की संतान की सहायता
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मेरी सन्तान के लिए कोई कार्य करे व उससे उस कार्य के बदले मे कुछ न ले तो मैं स्वंय उसको उस कार्य का बदला दूँगा।
5- अली व उन के अनुयायी
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने एक बार हज़रत अली अलैहिस्सलाम को देखने के बाद कहा कि यह व्यक्ति व इसके अनुयायी स्वर्ग मे जायेंगे।
6- क़यामत का दिन व अली के अनुयायी
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि आगाह (अवगत) हो जाओ कि आप व आपके अनुयायी स्वर्ग मे जायेंगे।
7-कुरऑन व अहलेबैत
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि जब मेरे पिता हज़रत पैगम्बर बीमारी की अवस्था मे अपने संसारिक जीवन के अन्तिम क्षणों मे थे तथा घर असहाब(पैगम्बर के साथीगण) से भरा हुआ था तो उन्होंने कहा कि मैं अब शीघ्र ही आप लोगों से दूर जाने वाला हूँ। (अर्थात मृत्यु होने वाली है) मैं आप लोगों के बीच अल्लाह की किताब कुऑन व अपने अहलिबैत( पवित्र वंश) को छोड़ कर जारहा हूँ। उस समय अली का हाथ पकड़ कर कहा कि यह अली कुऑन के साथ है तथा कुऑन अली के साथ है। यह दोनों कभी एक दूसरे से अलग नही होंगे यहां तक कि होज़े कौसर पर मुझ से मिलेंगे। मैं क़ियामत के दिन आप लोगों से प्रश्न करूँगा कि आपने मेरे बाद इन दोनों (कुऑन व वंश) के साथ क्या व्यवहार किया।
8- हाथों का धोना
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि अपने अलावा किसी दूसरे की भर्त्सना न करो। किन्तु उस व्यक्ति की भर्त्सना की जासकती है जो रात्री से पूर्व अपने चिकनाई युक्त गंदे व दुर्गन्धित हाथो को न धोये।
9- प्रफुल्ल रहना
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि जो ईमानदार व्यक्ति ख़न्दा पेशानी (प्रफुल्ल) रहता है, वह स्वर्ग मे जाने वाला है।
10- गृह कार्य
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने अपने पिता से कहा कि ऐ पैगम्बर मेरे दोनों हाथ चक्की मे घिरे रहतें है ,एक बार गेहूँ पीसती हूँ दूसरी बार आटे को गूँधती हूँ।
11- कंजूसी से हानि
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि कंजूसी (कृपणता) से बचो। क्योंकि यह एक अवगुण है तथा एक अच्छे मनुष्य का लक्ष्ण नही है। कंजूसी से बचो क्योकि यह एक नरकीय वृक्ष है ।तथा इसकी शाखाऐं संसार मे फैली हुई हैं। जो इनसे लिपटेगा वह नरक मे जायेगा।
12- सखावत
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि दान किया करो क्यों कि दानशीलता स्वर्ग का एक वृक्ष है। जिसकी शाखाऐं संसार मे फैली हुई हैं जो इनसे लिपटेगा वह स्वर्ग मे जायेगा।
13- पैगम्बर व उनकी पुत्री का अभिवादन
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि वह व्यक्ति जो मुझे व आपको तीन दिन सलाम करे व हमारा अभिवादन करे उसके लिए स्वर्ग है।
14- रहस्यमयी मुस्कान
जब पैगम्बर बीमार थे तो उन्होने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा को अपने समीप बुलाया तथा उनके कान मे कुछ कहा। जिसे सुन कर वह रोने लगीं पैगम्बर ने फिर कान मे कुछ कहा तो वह मुस्कुराने लगीं। हज़रत आयशा (पैगम्बर की एक पत्नी) कहती है कि मैने जब फ़तिमा से रोने व मुस्कुराने के बारे मे पूछा तो उन्हाने बताया कि जब पैगम्बर ने मुझे अपने स्वर्गवासी होने की सूचना दी तो मैं रोने लगी। तथा जब उन्होने मुझे यह सूचना दी कि सर्वप्रथम मै उन से भेंट करूंगी तो मैं मुस्कुराने लगी।
15- हज़रत फ़तिमा के बच्चे
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि अल्लाह ने प्रत्येक बच्चे के लिए एक माता को बनाया तथा वह बच्चा अपनी माता से सम्बन्धित होकर अपनी माता की संतान कहलाता है परन्तु फ़ातिमा की संतान, जिनका मैं अभिभावक हूँ वह मेरी संतान कहलायेगी।
16- वास्तविक सौभाग्य शाली
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि पैगम्बर ने कहा कि मुझे अभी जिब्राईल (हज़रत पैगम्बर के पास अल्लाह की ओर से संदेश लाने वाला फ़रिश्ता) ने यह सूचना दी है कि वास्तविक भाग्यशाली व्यक्ति वह है जो मेरे जीवन मे तथा मेरी मृत्यु के बाद हज़रत अली अलैहिस्सलाम को मित्र रखे।
17- पैगम्बर अहलेबैत की सभा मे
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा(स.) ने कहा कि एक दिन मैं पैगम्बर के पास गईं तो पैगम्बर ने मेरे बैठने के लिए एक बड़ी चादर बिछाई तथा मुझे बैठाया। मेरे बाद हसन व हुसैन आये उनसे कहा कि तुम भी अपनी माता के पास बैठ जाओ। तत्पश्चात अली आये तो उनसे भी कहा कि अपनी पत्नी व बच्चों के पास बैठ जाओ। जब हम सब बैठ गये तो उस चादर को पकड़ कर कहा कि ऐ अल्लाह यह मुझ से हैं और मैं इन से हूँ। तू इनसे उसी प्रकार प्रसन्न रह जिस प्रकार मैं इनसे प्रसन्न हूँ।
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