नेकी कर दरिया में डाल!!
नेकी कर दरिया में डाल!!
सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी
यह वह लोग हैं जो नेकी का बदला नेकी से देते हैं और यह मोमिनों, बुद्धिमानों और ईश्वर का धन्यवाद करने वाली का गुण है, नेकी करने वाले दो प्रकार के होते हैं एक वह लोग जो अगर कोई उनके साथ किसी प्रकार की भलाई करता है तो वह उसी मात्रा में या उससे अधिक उसके साथ भलाई करते हैं, और दूसरे वह लोग हैं जो बिना इस बात की प्रतीक्षा किए कि कोई उनके साथ नेकी करे वह दूसरों के साथ नेकी करते हैं।
वह लोग जो दूसरों की भलाई का उत्तर भलाई से देते हैं उनके बारे में क़ुरआन फ़रमाता है
هَلْ جَزَاءُ الْإِحْسَانِ إِلَّا الْإِحْسَانُ (1)
क्या नेकी का बदला नेकी के अतिरिक्त कुछ और है?
यह आयत स्पष्ट शब्दों में बता रही है कि नेकी का बदला केवल नेकी से ही होना चाहिए ऐसा न हो कि कोई इन्सान किसी के साथ कोई भलाई करे लेकिन उसके बदले में दूसरा उसके साथ बुराई करे।
और यहीं से इस मुहावरे का ग़लत होना साबित हो जाता है कि जहां कहा जाता है कि नेकी कर दरिया में डाल। नहीं ऐसा नहीं यह यह उन लोगों की सोंच हैं जिनको इस्लाम का कोई ज्ञान नहीं है, इस्लाम सारी इन्सानियत को एक नया पाठ पढ़ा रहा है और वह यह है कि नेकी करने वाले की नेकी बरबाद न होने पाए, उसकी भलाई का उपहास न किया जाए, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो धीरे धीरे एक समय ऐसा आएगा जब नेकी करने वाला अपनी नेकी और उसके मुक़ाबले में होने वाले बुरे व्यवहार से दुखी हो जाएगा, और यह संसार नेक और भले लोगों से ख़ाली हो जाएगा, इसलिए न केवल इस्लामी समाज बल्कि पूरे संसार के अस्तित्व के लिए आवश्यक है कि नेकी का उत्तर नेकी से दिया जाए।
इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ऊपर वाली आयत के अन्तर्गत फ़रमाते हैं
यह आयत मोमिन, काफ़िर, भले और बुरे हर प्रकार के इन्सान के लिए नाज़िल हुई है, जो भी किसी के साथ नेक कार्य करे तो सामने वाले का उत्तरदायित्व यह है कि वह भी उसके मुक़ाबले में भलाई करे।
फिर आप फ़रमाते हैं
नेकी और भलाई यह नहीं है कि नेकी करने वाले के मुक़ाबले में जितनी सामने वाले ने नेकी की है उसी मात्रा भर नेकी की जाए । नही! (बल्कि नेकी करने वाले का बदला नेकी की मात्रा से अधिक होना चाहिए, क्योंकि अगर कोई नेकी करने वाले का उत्तर उस की नेकी की मात्रा भर ही दे तो कोई बड़ी बात नहीं हुई है, यह तो नैतिकत कहती है नेकी का बदला नेकी से दिया जाए)
ख़्वाजा अब्दुल्लाह अंसारी कहते हैं
जितनी नेकी की जाए उतनी ही मात्रा में नेकी का उत्तर गधों का कार्य है, क्योंकि जब एक गधा दूसरे गधे का कंधा खुजाता है तो दूसरा भी उसका उसी मात्रा में कंधा खुजाता है। (2)
अगर बात यह हो कि नेकी का बदला नेकी की मात्रा भर ही दिया जाए तो जिस व्यक्ति ने पहले नेकी की है उसका मरतबा बुलंद है। (3)
और क़ुरआन भी इसी बात को बता रहा हैः अगर कोई तुमको सलाम करे, तुम्हारा सम्मान करे, तुम पर एहसान करे, तुम्हारे साथ भलाई करे या कोई चीज़ तुमको उपहार में दे तो तुम भी उसके सलाम का उत्तर उससे बेहतर अंदाज़ में दो, उसके एहसान और नेकी का उससे अच्छा बदला दो, उसको उपहार के रूप में उससे अच्छा हदिया दो। (4)
इस बारे में हम आपके सामने अहलेबैत अलैहेमुस्सलाम की कुछ हदीसों को पेश कर रहे हैं
अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम ने फरमाया
जो भी यह नियत करे कि नेकी करने वाले का उत्तर नेकी से देगा तो अगरचे उसके पास नेकी करने की शक्ति न हो तब भी वह नेकी करने वालों में हिसाब किया जाएगा। (4)
इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया
बख़्शिश और दूसरों के साथ नेकी करना एक ज़ंजीर और फंदा है नेकि किए जाने वाले व्यक्ति की गर्दन में जिसे कोई भी चीज़ नहीं खोल सकती है, मगर यह कि नेकी करने वाले का नेकी से उत्तर दिया जाए, और अगर नेकी से उत्तर न दे सकता हो तो कम से कम उसको नेकी करने वाले का धन्यवाद करना चाहिए और जितना संभव हो उसका सम्मान करना चाहिए। (5)
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(1) सूरा रहमान आयत 60
(2)फ़ेहरिस्ते किताब ज़िन्दगानी इमाम हसन मुजतबा पेज 350
(3)तफ़्सीरे नूरुल सक़लैन जिल्द 5, पेज 198, हदीस 58
(4)सूरा निसा आयत 86
(5)ग़ुररुल हेकम जिल्द 5, पेज 356, हदीस 8727 अनुवाद जमालुद्दीन ख़्वानसारी
(6)आसारुल सादेक़ीन जिल्द 19, पेज 273, हदीस 2
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